Sunday, February 17, 2013

||चाँद||

टिम टिम करते तारे थे, था चकमक चमकता चाँद,
उस चाँद के नज़ारे जो नज़ारे थे, दिखी हल्की सी इक मुस्कान,
हल्की सी इक मुस्कान , की बढ़ी सांसों की रफ़्तार,
फट के कौंधा इक ख्याल, क्या ये वही है?
वही जिसने थामा था मेरा हाथ, हाँ!
दिया था तब भी साथ, कि जब था मैं इक पंछी,
इक पंछी, उड़ता था फ़ैला पंख पसार,
तब भी चाँद वही था, थे वही टिमटिमाते तारे,
मुस्कान वही थी, थे वही आँखों के इशारे,
पिघल गयी थी बर्फ़ की वो चादर भी,
थम गया था धुल का वो तूफ़ान,
बादलों में छुप गया था सूरज भी, जब दिखा था मुझको मेरा चाँद,
टिम टिम करते तारे हैं, दूर चमकता चाँद।


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