Wednesday, October 31, 2012

लम्हे!!!

गुज़रे हुए लम्हों को आज ज़ब मैंने मुड़ के देखा,
बंद पन्नों से जब धुल उड़ा देखा,
चाँद को देखा, कुछ सितारे देखे,
बारिश देखी, बादलों में छुपा आसमां देखा,
धुंधली तस्वीरों में छुपे इशारे देखे,
कुछ सपने थे, थीं कुछ यादें,
कुछ नम थीं, तो कुछ थे खुशियों के वादे,
टूटी हुई कसमें थीं तो कुछ पक्के इरादे,

गुज़रे हुए लम्हों को आज ज़ब मैंने मुड़ के देखा,
उस कल में कल की परछाई देखी,
इक मुक्कमिल राह  देखी, पैरों के कुछ निशान देखे,
आने वाले लम्हों की तस्वीर देखी,
इक चमकता सूरज और इक खुला आसमां देखा,
इक ख्वाब देखा, खुशियों से भरा एक जहाँ देखा,
बीतें लम्हों से निकल आज  मैंने आते हुए लम्हों को मुस्कुरा कर देखा।

Thursday, October 18, 2012

दो लम्हे!!!

Some random thoughts, some random feeling! I was going through old pages of my diary and found an incomplete poem. So just worked a little to complete it. It sure is very nostalgic!


ज़िन्दगी के सफ़र में हम चले साथ,
दो कदम ही थे वो, बहुत बड़ी थी बात,
शायद अब तुम साथ आओ,
या फिर ख़ुशी से मुझे भूल जाओ,
एक ख्वाइश रखता हूँ, बस एक गुज़ारिश करता हूँ,
बस दो लम्हे और दे दो, दो कदम और साथ चल लो,
इस लम्हे में ज़िन्दगी जी  लूँ, कोशिश करूँगा,
वादा है मेरा तुझे भी भूलने दूंगा,
सोचोगे तुम भी कुछ ऐसा छूट गया,
एक पल में एक दिल टूट गया,
पर मेरे दोस्त तू जा, जिंदा रहूँगा मैं ये सोच,
जिसे था चाहा, साथ उसके लिए दो लम्हे बिता।

Tuesday, October 16, 2012

Finally!!!

Finally!!!

Procrastination....practiced so efficiently by mankind that today it is so much a part of our everyday life. i wont say am any different, but today finally i reached the threshold value and to bring this place back to life. Give it what it is supposed to have...My Words!!!


Somethings deserve a special place as they serve a special purpose in your life. So here I am, consolidating all my writing which is scattered from the last pages of my many notebooks to web pages of many sites. All in one place, my beloved Poems. So as i write this blog entry today, I wish to keep it alive as I am.


And to make it more special i will use only images clicked by me!

Sunday, September 9, 2012

सफ़र !!!


आज जब मैं ज़िन्दगी के पन्ने पलटता हूँ,
उस धुंधली तस्वीर से धुल उदा देखता हूँ,
सुनहरी यादों से भरी एक रह नज़र आती है,
चले थे जिस पर अकेले हम, पर आज इक भीड़ नज़र आती है,
की हर चेहरा इक कहानी बयां करता है आज,
कहीं है प्यारी सी हंसी तो कहीं छुपे हैं हजारो ऱाज ,
इन्ही चेहरों को समेटे ज़िन्दगी चली जा रही है,
कुछ याद़ों के थपेड़े, तो कुछ सपनों के झोंके ला रही है,
के हर लम्हा कानों में एक बात कह जाता है,
खुशियों से भरी ये दुनिया है, मुस्कुरा के जी ले ज़िन्दगी,
हर पन्ने पे इक छाप छोड़, जी भर के जी ले ज़िन्दगी।।