"अभी मंजिलें और भी हैं, एक मोड़ पे रुक न जाना; अभी ज़िन्दगी और भी है, यूँ ही हार न जाना; ऐ मेरे दोस्त ! अभी दुनिया के रंग और भी हैं... यूँ ही थम न जाना..."
main chalagham ke sagar ko kaatkarsukoon ke sahil ko choomne
main chala
ReplyDeletegham ke sagar ko kaatkar
sukoon ke sahil ko choomne